godwana GSU
*बैठक में टी॰वी॰ चल रहा था, जिस पर रामायण आ रही थी।* मेरे मित्र काफी गौर से रामायण देख रहे थे। तभी रामायण में एक दृश्य ऐसा आता है जब रामायण के पात्र किसी राक्षस को मारते हैं। तभी मेरे दोस्त अशोक चौधरी मुझसे कहते हैं। *लो हो गया इस दैत्य 'राक्षस' का भी काम तमाम* अब इतना सुनते ही मैंने उनसे कहा श्रीमान इतना खुश होने की क्या आवश्यकता है? तभी मेरे मित्र अशोक चौधरी बोलते हैं, मैं इसलिए खुश हो रहा हूँ की राम ने *राक्षस* का अंत किया। तभी मैंने कहा 'तो फिर इसमें खुश होने की क्या बात? *राक्षस तो आप भी हो।* अशोक जी थोड़े गुस्से में, *आपने हमें राक्षस क्यों कहा?* हम राक्षस थोड़े ही हैं? *मैंने कहा अशोक जी आप राक्षस नही तो और क्या हो?* *आप भी राक्षस और आपका बेटा भी राक्षस?* तभी अशोक जी गुस्से से 'लथपथ' आग-बबुला होकर बोले, *हम आपकी इज्जत करते हैं इसका मतलब यह नही की आप हमारी सरेआम बेईजत्ती करेगो।* हमें आपसे यह उम्मीद नही थी। मैंने कहा अशोक जी मैंने आपको गलत ही क्या बोला? मैं तो अभी भी आपको और आपके बेटे को राक्षस कहुंगा चाहे आप मुझे कुछ भी कहो, या मे...